हर इंसान एक चलती फिरती किताब होता है, बस हम पढ़ने की ज़हमत नहीं करते क्योंकि हम समझते हैं कि इल्म सिर्फ किताबों से हासिल किया जाता है हालांकि ज़िंदगी गुज़ारने के असल सबक़ तो हमें इंसानों और उनके रवैय्यों से मिलते हैं।
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