Salman Siddiqui
Whenever someone makes you feel worthless, just remember ALLAH loves you.
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इक़बाल तेरी क़ौम का इक़बाल खो गया माज़ी तो सुनहरा था मगर हाल खो गया वो रोब वो दबदबा वो जलाल खो गया वो हुस्न बे मिसाल वो जमाल खो गया #AllamaIqbalDay के मौक़े पर खिराजे अकीदत पेश कर...
हर इंसान एक चलती फिरती किताब होता है, बस हम पढ़ने की ज़हमत नहीं करते क्योंकि हम समझते हैं कि इल्म सिर्फ किताबों से हासिल किया जाता है हालांकि ज़िंदगी गुज़ारने के असल सबक़ तो हमें इ...
अस्पताल पर इज़राइली आतंकी हमले के बाद रात से सो नहीं पाया हूँ। रो पड़ा 😢 ये कैसे जानवर हैं जो मासूमों का खून बहाना धर्म समझते हैं और भारत में बैठे हत्यारे इनका साथ देने की माँग कर...
देश का सबसे बड़ा मनोवैज्ञानिक माॅब लिंचिंग करने वाला, वैचारिक आतंकी गिरोह 'लशकर ए मीडिया' जो चौबीसों घंटे हिंदू-मुस्लिम मुद्दों पर पेट्रोल छिड़कता है, इसका परोसा वैचारिक ज़हर ही दे...
हुज़ूर ﷺ ने फ़रमाया:- “तीन मस्जिदों के सिवा किसी के लिए क़ज़ावे ना बांधे जाए (यानी सफ़र ना किया जाए) एक मस्जिद-ए-हराम, दूसरी मस्जिद-ए-नबवी और तीसरी मस्जिद-ए-अक़्सा (बेतुल-मुक़द्दस...
तमाम आइम्मा, उलमा, और दीनी मदारिस के तलबा और हर मुसलमान को अहले फिलिस्तीन के लिए दुआ माँगनी चाहिए, अल्लाह उन्हें ज़ुल्म व सितम से निजात दे, उनके लिए ज़मीन को कुशादा कर दे और मुसलमा...
काका आवाज़ का नाम है काका इन्क़लाबी जज़्बे का नाम है काका हक़ का नाम है काका कलम का नाम है काका हिम्मत का नाम है काका वो है जिनकी क़लम को देख कर 50% हम जैसे युवा लिखना सीखें है...
हज़रत याकुब अलैहिस्सलाम का दुसरा नाम इसराइल था इनकी औलाद बनी इसराइल यानी औलादे इसराइल कहलाई हज़रत याकुब अलैहिस्सलाम के एक बेटे का नाम यहुदा था जिन की नस्ल को हम यहुदियों के नाम से...
यहूदी मस्जिद-ए-अक्सा को शहीद करके उसकी जगह पर हैकल-ए-सुलेमानी तआमिर करना चाहते है उसके बाद ब्रिटेन के महारानी के तख्त के निचे जो पत्थर है वो उसमे रखा जाएगा ये वही पत्थर हैं जिस पर...
फिलिस्तीन में अनक़रीब मुसलमानो की तीसरी सबसे पवित्र #मस्जिद_अल_अक़्सा और बैतुल मुकद्दस शहीद होने वाली है और यहुदियो का थर्डटेम्पल #हैकल_ए_सुलेमानी तामीर होने वाला है जिसका पूरा मॉड...
• ताबूत ऐ सकीना • लाल क़िताब • हैकल सुलेमानी बस कहानी यही है फिलिस्तीन और इज़राइल के इस युद्ध की https://t.co/MYQRKS79Ce
मुक़ल्लिदीन एक उम्मती इमाम की तक़लीद करके ख़ुद को हक़ पर समझते हैं तो फ़िर हम अहले हदीस मुवह्हिदीन इमाम उल अंबिया ﷺ की इत्तिबा करके ब-दर्जा औला हक़ पर हैं।