तहक्षी™ Tehxi
तहक्षी™ Tehxi

@yajnshri

7 Tweets 37 reads Aug 31, 2024
यदि आप नवार्ण मंत्र जाप करते है और जाप करना चाहते है तो ये #thread 🧵 अवश्य पढ़िए
🔹नवार्ण मंत्र क्या है ?
🔹 नवार्ण मंत्र में कैसे वास करते है नव ग्रह?
🔹 नवार्ण मंत्र में कैसे है नव दुर्गे वास?
🔹 नवार्ण मंत्र का कितना जाप करना चाहिए ?
🔹नवार्ण मंत्र- मंत्र क्या है ?
नवार्ण मंत्र-
|| ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे ||
ऐं = सरस्वती का बीज मन्त्र है।
ह्रीं = महालक्ष्मी का बीज मन्त्र है ।
क्लीं = महाकाली का बीज मन्त्र है।
नौ अक्षर वाले इस अद्भुत नवार्ण मंत्र में देवी दुर्गा की नौ शक्तियांसमायी हुई है | जिसका सम्बन्ध नौ ग्रहों से भी है |
मंत्र शब्दों का संचय होता है, जिससे इष्ट को प्राप्त कर सकते हैं और अनिष्टबाधाओं को नष्ट कर सकते हैं। मंत्र इस शब्द में 'मन्' का तात्पर्य मन और मनन से है और 'त्र' का तात्पर्य शक्ति और रक्षा से है । मंत्र का अर्थ है अक्षर, नाद, शब्द अथवा शब्दों का समूह जो आत्मज्ञान अथवा ईश्वरीय स्वरूप का प्रतीक है मंत्रजप से स्व- रक्षा अथवा विशिष्ट उद्देश्य साध्य करना संभवहोता है। मंत्र को दोहराते समय विधि, निषेध तथा नियमों का विशेष पाल न करना आवश्यकहोता है । यह मंत्र तथा मंत्र साधना (मंत्रयोग) का महत्त्वपूर्ण अंग है ।
🔹 नवार्ण मंत्र महत्वः- माता भगवती जगत् जननी दुर्गा जी की साधना-उपासना के क्रम में, नवार्ण मंत्र एक महत्त्वपूर्ण महामंत्र है | नवार्ण अर्थात नौ अक्षरों का इस नौ अक्षर के महामंत्र में नौ ग्रहों को नियंत्रित करने की शक्ति है, जिसके माध्यम से सभी क्षेत्रों में पूर्ण सफलता प्राप्त की जा सकती है और भगवती दुर्गा का पूर्ण आशीर्वाद प्राप्त किया जा सकता है यह महामंत्र शक्तिसाधना में सर्वोपरि तथा सभी मंत्रों- स्तोत्रों में से एक महत्त्वपूर्ण महामंत्र है। यह माता भगवती दुर्गा जी के तीनों स्वरूपों माता महासरस्वती, माता महालक्ष्मी व माता महाकाली की एकसाथ साधना का पूर्ण प्रभावक बीज मंत्र है और साथ ही माता दुर्गा के नौ रूपों का संयुक्त मंत्रहै और इसी महामंत्र से नौ ग्रहों को भी शांत किया जा सकता है |
इसके साथ नवार्ण मंत्र के
🔹प्रथम बीज ” ऐं “ से माता दुर्गा की प्रथम शक्ति माता शैलपुत्री की उपासना की जाती है, जिस में
सूर्य ग्रहको नियंत्रित करने की शक्ति समायी हुई है।
🔹नवार्ण मंत्र के द्वितीय बीज “ह्रीं” से माता दुर्गा की द्वितीय शक्तिमाता ब्रह्मचारिणी की उपासना की जाती है, जिस में चन्द्र ग्रह को नियंत्रित करने कीशक्ति समायी हुई है।
🔹नवार्ण मंत्र के तृतीय बीज ” क्लीं “ से माता दुर्गा की तृतीय शक्तिमाता चंद्रघंटा की उपासना की जाती है, जिस में मंगल ग्रह को नियंत्रित करने की शक्ति समायी हुई है।
🔹नवार्ण मंत्र के चतुर्थ बीज “चा” से माता दुर्गा की चतुर्थ शक्तिमाता कुष्मांडा की उपासना की जाती है, जिस में बुध ग्रह को नियंत्रित करने की शक्ति समायी हुई है।
🔹नवार्ण मंत्र के पंचम बीज “मुं” से माता दुर्गा की पंचम शक्ति माँस्कंदमाता की उपासना की जाती है, जिस में बृहस्पति ग्रह को नियंत्रित करने की शक्ति समायी हुई है।
🔹नवार्ण मंत्र के षष्ठ बीज “डा” से माता दुर्गा की षष्ठ शक्ति माता कात्यायनी की उपासना की जाती है, जिस में शुक्र ग्रह को नियंत्रित करने की शक्ति समायी हुई है |
🔹नवार्ण मंत्र के सप्तम बीज “यै” से माता दुर्गा की सप्तम शक्तिमाता कालरात्रि की उपासना की जाती है, जिस में शनि ग्रह को नियंत्रित करने की शक्ति समायी हुई है।
🔹नवार्ण मंत्र के अष्टम बीज “वि” से माता दुर्गा की अष्टम शक्तिमाता महागौरी की उपासना की जाती है, जिस में राहु ग्रह कोनियंत्रित करने की शक्ति समायी हुई है |
🔹नवार्ण मंत्र के नवम बीज “चै” से माता दुर्गा की नवम शक्ति मातासिद्धीदात्री की उपासना की जाती है, जिस में केतु ग्रह को नियंत्रित करने की शक्ति समायी हुई है ।
🔹 नवार्ण मंत्र की सिद्धि नवरात्रि के 9 दिनो मे
1, 25000 मंत्र जाप से होती है, परंतु आप ये से नही हो सकता तो , रोज 1,3,5,7,11,21....इत्यादि माला मंत्र जाप भी कर सकते है, इस विधि से सारी इच्छाये पूर्ण होती है, सभी दुख समाप्त होते है और धन सहज आता है ।
🔹यदि आप ॐ लगा कर मंत्र जाप करते है तो
एक बीजमंत्र, मंत्र का बीज होता है। यह बीज मंत्र के विज्ञान को तेजी से तेज देता है किसी मंत्र की शक्ति उसके बीज में हो ती है । मंत्र का जप केवल तभी प्रभावशाली होता है जब योग्य बीज चुना जाए । बीज, मंत्र के देवता की शक्ति को जागृत करता है। प्रत्येक बीजमंत्र में अक्षर समूह होते हैं । उदाहरण के लिए – ॐ, ऐं, क्रीं, क्लीम्
ॐ का रहस्य क्या है ___ ॐ को सभी मंत्रों का राजा माना जाता है । सभी बीजमंत्र तथा मंत्र इसीसे उत्पन्न हुए हैं। इसे कुछ मंत्रों के पहले लगाया जाता है। यह परब्रह्म का परिचायक है। ॐ का रहस्य - निरंतर जप का प्रभाव ॐ ईश्वर के निर्गुण तत्त्व से संबंधित है । ईश्वर के निर्गुण तत्त्व से ही पूरे सगुण ब्रह्मांड निर्मित हुई है । इस कारण जब कोई ॐ का जप करता है, तब अत्यधिक शक्ति निर्मित होती है। यह ॐ का रहस्य है

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