!!!!The vastu sutras !!!!
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मकान की पूर्व-पश्चिम रेखा ठीक हो तो उस मकान में रहनेवालों को खुशहाली प्राप्त होगी। मकान में विषुववृत्त प्राकृतिक नियमानुसार होने पर वह मकान भाग्यशाली साबित होगा। अर्थात पूर्व दिशा में प्रवेशद्वार होना अपरिहार्य है। संध्या करते समय 'ईशान्य दिशे ईश्वराय नमः' बोलते हैं। मकान में ईशान्य दिशा में सूर्य की किरणें आती हों तो उसमें रहनेवालों पर भगवान की कृपा ही समझनी चाहिए। ज्योतिषशास्त्र के महान एवं श्रेष्ठ ग्रंथ जातक पारिजात में आठ दिशाओं का उल्लेख है। अमरकोष में दिशाओं का उल्लेख निम्न प्रकार से किया गया है
सूर्यः शुक्रो महोसुनः राचर्भानुभोनुजो विधः।
बुधो बृहश्चतिश्चेति दिशा चैव ग्रहाः।
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मकान की पूर्व-पश्चिम रेखा ठीक हो तो उस मकान में रहनेवालों को खुशहाली प्राप्त होगी। मकान में विषुववृत्त प्राकृतिक नियमानुसार होने पर वह मकान भाग्यशाली साबित होगा। अर्थात पूर्व दिशा में प्रवेशद्वार होना अपरिहार्य है। संध्या करते समय 'ईशान्य दिशे ईश्वराय नमः' बोलते हैं। मकान में ईशान्य दिशा में सूर्य की किरणें आती हों तो उसमें रहनेवालों पर भगवान की कृपा ही समझनी चाहिए। ज्योतिषशास्त्र के महान एवं श्रेष्ठ ग्रंथ जातक पारिजात में आठ दिशाओं का उल्लेख है। अमरकोष में दिशाओं का उल्लेख निम्न प्रकार से किया गया है
सूर्यः शुक्रो महोसुनः राचर्भानुभोनुजो विधः।
बुधो बृहश्चतिश्चेति दिशा चैव ग्रहाः।
1. स्वयं के रहने के लिए निर्मित मकान का मुख्य प्रवेशद्वार पूर्वोत्तर या ईशान्य में हो। पश्चिम, दक्षिण, आग्नेय एवं पश्चिम-वायव्य द्वार भी ठीक है। किंतु नैऋत्य, पूर्व-आग्नेय एवं उत्तर-आग्नेय में मकान का प्रवेशद्वार नहीं होना चाहिए। दक्षिण में भी मुख्य प्रवेशद्वार न हो।
2 . प्रवेशद्वार के सामने खंभा, कुआं, बड़ा पेड़,गैर कानूनी व्यवसाय करनेवालों की दुकानें नहीं होनी चाहिए।
3 . घर के कर्ता पुरुष का शयनकक्ष नैऋत्य में हो। मेहमानों को इस शय्यागृह का उपयोग न करने दें। शयनकक्ष में मंदिर नहीं होना चाहिए। अगर जगह की असुविधा हो तो छोटे बाल-बच्चे एवं बुजुर्ग व्यक्ति यहां सो सकते हैं।
4. पश्चिम या दक्षिण में शयनकक्ष होना उत्तम
है
5. घर के दरवाजे एक कतार में दो से अधिक नहीं होने चाहिए। दरवाजों की संख्या सम यानी 4, 6, 8, 12 होनी चाहिए। 1, 3, 5, 7 हो तो एक दरवाजा कम करें या एक दरवाजा अधिक बनवाएं।
2 . प्रवेशद्वार के सामने खंभा, कुआं, बड़ा पेड़,गैर कानूनी व्यवसाय करनेवालों की दुकानें नहीं होनी चाहिए।
3 . घर के कर्ता पुरुष का शयनकक्ष नैऋत्य में हो। मेहमानों को इस शय्यागृह का उपयोग न करने दें। शयनकक्ष में मंदिर नहीं होना चाहिए। अगर जगह की असुविधा हो तो छोटे बाल-बच्चे एवं बुजुर्ग व्यक्ति यहां सो सकते हैं।
4. पश्चिम या दक्षिण में शयनकक्ष होना उत्तम
है
5. घर के दरवाजे एक कतार में दो से अधिक नहीं होने चाहिए। दरवाजों की संख्या सम यानी 4, 6, 8, 12 होनी चाहिए। 1, 3, 5, 7 हो तो एक दरवाजा कम करें या एक दरवाजा अधिक बनवाएं।
6. पूजास्थान ईशान्य के कमरे में होना चाहिए। कमरे में पूर्व दिशा की दीवार पर देवघर इस तरह से बैठाएं कि पूजा करनेवाले का मुंह पूर्व की ओर एवं देव-देवताओं के मुंह पश्चिम दिशा की ओर हों।
7. रसोईघर आग्नेय में होना चाहिए। रसोई बनाते समय रसोई में काम करनेवाले का मुंह पूर्व दिशा में हो।
8. घर की मुख्य सीढ़ियां दक्षिण या पश्चिम की ओर होनी चाहिए। ईशान्य में नहीं होनी चाहिए। वायव्य, आग्नेय दिशा में भी ठीक है।
9. दक्षिण-पश्चिम या नैऋत्य में सीढ़ियां होना लाभप्रद होता है। सीढ़ियों के नीचे कभी न सोएं। भगवान का मंदिर एवं कैश बॉक्स भी वहां न रखें। सीढ़ियों के नीचे का हिस्सा कोठरी के लिए उपयोग में लाया जा सकता है।
10 रसोईघर में गैस चूल्हा आग्नेय में पूर्व या दक्षिण की तरफ 2-3 इंच जगह छोड़कर रखना चाहिए।
11. पूजास्थान में होमकुंड या अग्निकुंड रखना हो तो वह आग्नेय में रखें। होम में आहुति देते समय मुंह पूर्व की तरफ होना चाहिए।
7. रसोईघर आग्नेय में होना चाहिए। रसोई बनाते समय रसोई में काम करनेवाले का मुंह पूर्व दिशा में हो।
8. घर की मुख्य सीढ़ियां दक्षिण या पश्चिम की ओर होनी चाहिए। ईशान्य में नहीं होनी चाहिए। वायव्य, आग्नेय दिशा में भी ठीक है।
9. दक्षिण-पश्चिम या नैऋत्य में सीढ़ियां होना लाभप्रद होता है। सीढ़ियों के नीचे कभी न सोएं। भगवान का मंदिर एवं कैश बॉक्स भी वहां न रखें। सीढ़ियों के नीचे का हिस्सा कोठरी के लिए उपयोग में लाया जा सकता है।
10 रसोईघर में गैस चूल्हा आग्नेय में पूर्व या दक्षिण की तरफ 2-3 इंच जगह छोड़कर रखना चाहिए।
11. पूजास्थान में होमकुंड या अग्निकुंड रखना हो तो वह आग्नेय में रखें। होम में आहुति देते समय मुंह पूर्व की तरफ होना चाहिए।
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