विद्रोही...
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@ceaser0o7

6 Tweets 15 reads Jan 03, 2024
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#Heliodorus
1.#हेलिओडोरस लेख की सच्चाई । 2 लेख मिले
कलम कसाई लेखकों ने हेलिओडोरस(2nd BCE) के स्तंभ को ब्राह्मण धर्म,तथाकथित वासुदेव सम्प्रदाय और शुंग वंश से जोड़ दिया हैं। यहां आप देख सकते हैं की ओरिजिनल लेख में वासुदेव नहीं हैं और ना उस समय त्र वर्ण का प्रयोग होता था
2. अभ इसी लेख को पाली पाकित्थ और नागरी में लिखा जाए तो कही भी त्र वर्ण का प्रयोग नहीं होता हैं ना वहा सुदेव मिलेगा। यहां पालि के देव देवस वासु देवस का अर्थ सभी अरहत देव के देव बुद्ध के लिए कहा गया है।भगवा बुद्ध के लिए प्रयोग होता था जिसे आज एक काल्पनिक नाम से पुकारते हैं।
3. यहां जो भगवा शब्द आया है उसका पालि में व्याकरण भी समझनी पड़ेगी, इन कलम कसाई लेखकों ने जिस भगवता, भगवतो के नाम पर एक सम्रदाय खडा किया है वो भगवा बुद्ध के लिए कहा जाता है और इस भगवा मूल धातु की आठ विभक्ति होती और हर विभक्ति का एक वचन और दो वचन होता हैं जिसके अलग अर्थ होते हैं।
4. हेलियोडोरस अगर ब्राह्मणी व्यवस्था से होता तो गीता, महाभारत की बात करता लेकिन वो तो मौर्या के स्तंभ बना कर पालि में लिखवा रहा हैं।बुद्ध और बुद्ध के धम्म की बात कर रहा है। जहा से ये आया वो भी धम्म प्रभावित क्षेत्र था तो वहा पर विष्णु, गीता,महाभारत के अभिलेख क्यू नहीं लिखवाए ?
5. हेलियोडोरस दुसरे लेख में बुद्ध के धम्मपद की चर्चा करता यहां त्रिनी अमृतपादनि की बात होती ,हैं जो इस प्रकार हैं ।
6. बुद्ध, धम्मपद स्तंभ, पालि इन सभी बातों से पता चलता है कि हेलियोडोरस किसी भी आज के ब्राह्मण धर्मी सम्प्रदाय की बात नहीं की ना उस समय ये थे और ना कोई भागवत सम्रंदाय था ये सब इन भ्रमवंशी लेखकों की गपोड़ गाथा हैं।

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