यह आदि शंकराचार्य द्वारा लिखा गया था और यह सबसे प्रभावी और शक्तिशाली मंत्रों में से एक है .
इस मंत्र का मूल भाव यह है कि मैं किसी भी चीज से बंधा नहीं हूं, चाहे वह शारीरिक हो या मानसिक. मैं शिव हूं.
दिन में एक बार निर्वाण शतकम् का जाप और श्रवण आपके चारों ओर बेहद सकारात्मक ऊर्जा…
इस मंत्र का मूल भाव यह है कि मैं किसी भी चीज से बंधा नहीं हूं, चाहे वह शारीरिक हो या मानसिक. मैं शिव हूं.
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