तहक्षी™ Tehxi
तहक्षी™ Tehxi

@yajnshri

6 Tweets 10 reads Jul 25, 2023
योग, नाद योग, दीक्षा, ब्राह्मचार्य, स्वर विज्ञान, ध्यान के बारे में हम सबने थोड़ा तो पढ़ा ही है किन्तु कभी अपने ग्रंथि भेद के बारे में सूक्ष्मता से पढ़ा है.....?
𝗶𝗳 𝘆𝗼𝘂 𝗻𝗼𝘁 𝗵𝗲𝗮𝗿𝗱 𝗮𝗯𝗼𝘂𝘁 𝘁𝗵𝗮𝘁 𝗴𝗶𝘃𝗲 𝗮 𝗼𝗻𝗲 𝗿𝗲𝗮𝗱 𝘁𝗼 𝘁𝗵𝗶𝘀 #Thread
ये एक अलौकिक…
सामाजिक जीवन को मधुर बनाएँ। देश, जाति और समाज के प्रति अपने कर्तव्य का पालन करें, यही पितृ ऋण से, पूर्ववर्ती लोगों के उपकारों से उऋण होने का मार्ग है। व्यक्तिगत जीवन को शारीरिक, बौद्धिक और आर्थिक शक्तियों से सुसम्पन्न बनाना अपने को मनुष्य जाति का सदस्य बनाना ऋषि ऋण से छूटना है।…
रुद्र-ग्रन्थि का आकार बेर के समान ऊपर को नुकीला, नीचे को भारी, पैदे में गड्ढा लिए होता है, इसका वर्ण कालापन मिला हुआ लाल होता है। इस ग्रन्थि के दो भाग हैं। दक्षिण भाग को रुद्र और वाम भाग को काली कहते हैं। दक्षिण भाग के अन्तरंग गहर में प्रवेश करके जब उसकी झाँकी की जाती है, तो…
विष्णु ग्रन्थि किस वर्ण की, किस गुण की, किस आकार की किस आन्तरिक स्थिति की, किस ध्वनि की, किस आकृति की है ? यह सब हमें विष्णु के चित्र से सहज ही प्रतीत हो जाता है। नील वर्ण, गोल आकार, शंख ध्वनि, कौस्तुभ मणि, वनमाला यह चित्र उस मध्य-प्रन्थि का सहज प्रतिबिम्ब है।
जैसे मनुष्य को मुख…
रुद्र, विष्णु और ब्रह्म ग्रन्थियों को खोलने के लिए ग्रन्थि के मूल भाग में निवास करने वाली बीज शक्तियों का संचार करना पड़ता है। उसे 'क्लीं' बीज कहते हैं। विष्णु ग्रन्थि के मूल में 'श्री" का निवास है और ब्रह्म ग्रन्थि के नीचे 'ह्रीं' तत्त्व का अवस्थान है। मूलबन्ध बाँधते हुए एक ओर…
ब्रह्म-ग्रन्थि मस्तिष्क के मध्य भाग में सहस्रदल कमल की छाया में अवस्थित है। उसे अमृत कलश कहते है, बताया गया है कि सुरलोक में अमृत कलश की रक्षा सहस्र फनों वाले शेषनाग करते हैं। इसका अभिप्राय इसी बह्य ग्रन्थि से है ध्यान और धनञ्जय प्राणों द्वारा ब्रह्म-ग्रन्थि को पकाया जाता है ।…

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