तहक्षी™ Tehxi
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@yajnshri

6 Tweets 24 reads Jan 14, 2023
What is yog nadi shashtra ?
योग नाड़ी (स्वर ) शास्त्र क्या है?
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स्वर शास्त्र के अनुसार श्वास-प्रश्वास के मार्गों को नाड़ी कहते हैं। शरीर में ऐसी नाड़ियों की संख्या ७२००० (72000)है। इनको नसें नहीं समझना चाहिए, यह प्राण वायु आवागमन के मार्ग हैं। नाभि में इसी प्रकार की एक नाड़ी कुण्डली के आकार में है। जिसमें से १ - इड़ा, २- पिंगला, ३- सुषुम्ना,
४- गंधारी
५- हस्त - जिह्वा
६- पूषा,
७- यशश्विनी
८- अलंबुषा
९- कुहू तथा १० शंखिनी नामक दस नाड़ियाँ निकली हैं और यह शरीर के विभिन्न भागों की ओर चली जाती हैं। इनमें से पहली तीन प्रधान हैं। इड़ा को 'चन्द्र' कहते हैं जो बाँयें नस में है। पिंगला को 'सूर्य' कहते हैं, यह दाहिने नस
में है । सुषुम्ना को वायु कहते हैं जो दोनों नसो के मध्य में है। जिस प्रकार संसार में सूर्य और चन्द्र नियमित रूप से अपना-अपना काम करते हैं, उसी प्रकार इड़ा, पिंगला भी इस जीवन में अपना-अपना कार्य नियमित रूप से करती हैं। इन तीनों के अतिरिक्त अन्य सात प्रमुख नाड़ियों के स्थान इस
प्रकार हैं - गांधारी बायें नेत्र में, हस्त- जिह्वा दाहिनी, आँख में, पूषा दाहिने कान में, यशश्विनी बाँयें कान में, अलम्बुषा - मुख में, कुहू लिंग में और शंखिनी गुदा (मूलाधार) में। इस प्रकार शरीर के दस द्वारों में दस नाड़ियाँ हैं । इन नाड़ियों का नाम दुर्गा कवच में भी आया है
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