तहक्षी™ Tehxi
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@yajnshri

5 Tweets 33 reads Dec 21, 2022
BEEJ MANTRA MYSTIC SEED LETTERS how ?
how beej mantra works ?
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बीजाक्षरों की उत्पत्ति णमोकार मन्त्र से ही हुई है । कारण सर्व मातृका ध्वनि इसी मन्त्र से उदभूत है । इन सब में प्रधान "ॐ " बीज है । यह आत्म वाचक है, मूल भूत है । इसको तेजो बीज, काम बीज और भाव बीज मानते है
प्रणव वाचक पंच परमेष्ठी वाचक होने से 'ॐ' समस्त मन्त्रों का सार तत्त्व है ।
श्री - "कीर्ति वाचक
ह्रीं - कल्याण
प्रौ प्री - स्तंभन
श्री .........शान्ति
क्ली ........लक्ष्मी प्राप्ति वाचक
ॐ -सर्व तीर्थकरों के नाम मंगलवाचक सुख
बीजाक्षर मन्त्र
(1 ) ॐ - इसे 'प्रणव' नाम से ही उत्सव है। अरिहन्तशरीर अ (सिद्ध) आचार्य, उपाध्याय, मुनि (साधु) इनमें पहले अक्षर लेकर सन्ध्यक्षर ॐ बना है। यह परमेष्ठीवाचक है ।
(2) ह्र - यह मंत्र राज, मंत्राधिप, यह नाम से प्रसिद्ध है। सब तत्वो का नायक बीजाक्षर तत्व है। इसे कोई भी
बुद्धि तत्व, कोई हरि, कोई ब्रह्म, महेश्वर या शिव तत्व या कोई सावं, सर्वांगीण या ईशान तत्व इत्यादि कई नामो से पुकारता है। इसे 'व्योम बीज' भी कहते हैं।
( ३ ) ह्रीं मन्त्र का नाम 'माया वर्ण', माया बीज और शक्ति वीज ही कहते है ।
( ४ ) इवीं मन्त्र का नाम सकल सिद्ध विद्या या महा
विद्या है, इसे 'अमृत वीज' ही
कहते है । श्री मन्त्र का नाम छिन्न मस्तक महावीज है । इसे 'लक्ष्मी वीज' ही कहते है ।
क्लीं : -मन्त्र का नाम काम वीज है ।
ऐ मन्त्र का नाम 'काम वीज' और 'विद्या वीज' ही है ।
क्षवीं -- मंत्र का नाम क्षिति वीज है ।
स्वा मंत्र का नाम वायु वीज है।

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