षट्कोण - सृष्टि, स्थिति, संहार, निग्रह, ग्रेस, निग्रह - ग्रेस स्टेटये । पटकोण में देवता के पड़ांगों की कल्पना कर देवभाव को प्राकट्य किया जाता है।
अष्टदल अष्टदलों में अधिकतर ब्राह्मयादि अष्टमातृका या अष्टभैरवों का पूजन अथवा देवी की अष्टांग शक्तियों - का वर्णन होता है।
अष्टदल अष्टदलों में अधिकतर ब्राह्मयादि अष्टमातृका या अष्टभैरवों का पूजन अथवा देवी की अष्टांग शक्तियों - का वर्णन होता है।
शब्द ब्रह्म है इस सिद्धान्त के अनुसार आर्कषण, मारण, मोहन, उच्चाटन, वशीकरण, अर्थसिद्धि, धनप्राप्ति, देह रक्षा, मार्गरक्षा, संतान प्राप्ति, राजविजय हेतु अनेकानेक कार्य हेतु मनीषियों ने कई यंत्रों का निर्माण किया है।
इस तरह तंत्र साधना में तीनों क्रियाओं का समावेश है।
इस तरह तंत्र साधना में तीनों क्रियाओं का समावेश है।
मंत्र साधना के साथ, देवता का यंत्राचन पश्चात् हवनादि कर्म एवं बलिकर्म सन्निहित है।
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