अखण्ड भारत ❤️
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@Sarkar_sandyy

23 Tweets 14 reads Sep 16, 2022
#Thread
वक्फ अधिनियम 1995 (व्याख्या)
वक्फ क्या है?
वक्फ अधिनियम 1995 क्या है?
वक्फ बोर्ड की क्या शक्तियां हैं?
क्या वक्फ बोर्ड आपके घर पर अपनी संपत्ति के रूप में दावा कर सकता है?
इस श्रंखला को पढ़ने के बाद, आप #कांग्रेस से नफरत करेंगे ,सच जानकर चौंक जाएंगे
वक्फ ऐसा कृत्य जो #धर्मनिरपेक्ष देश में मौजूद है।
यहां तक ​​कि किसी #मुस्लिम देश में भी ऐसा कृत्य नहीं होता।
वक्फ सिस्टम?
यह #मुस्लिम ब्रदरहुड चैरिटी सिस्टम का एक हिस्सा है। मान लीजिए अहमद 80 साल का है। उनके पास दो फ्लैट हैं। मरने से पहले उसने 1 फ्लैट वक्फ को दान कर दिया
अब यह संपत्ति #अल्लाह की है। वक्फ बोर्ड उस फ्लैट का मालिक नहीं बल्कि केयरटेकर है और वे उस फ्लैट का उपयोग #मुस्लिम स्कूल, छात्रावास, सामुदायिक हॉल या समुदाय के लिए किसी रुप में कर सकते हैं। वास्तविक रूप में
यही उद्देश्य था । परन्तु अब इसका उद्देश्य यह नहीं रहा
समय के साथ यह उद्देश्य बदल गया
1947 में जो हिंदू #पाकिस्तान में अपनी जमीन छोड़ कर भारत आए तो उसके बाद वहां हिंदुओ
की सारी जमीन पकिस्तान सरकार ने जब्त कर ली पाक ने उस जमीन को #मुस्लिमों और राज्य सरकार को दे दिया लेकिन #गांधी ,#नेहरू ने इसके विपरीत किया।
उन्होंने पाकिस्तान गए सभी #मुसलमानों की जमीन हिंदुओ को नही बल्कि #वक्फबोर्ड को दे दी। 1954 अधिनियम इतना कठोर नही था वास्तविक परिवर्तन 1995 में आया था
#कांग्रेस नेता एन पीएम पीवी नरसिम्हा राव वक्फ अधिनियम 1995 लाए और उन्होंने वक्फ को भूमि अधिग्रहण करने के लिए असीमित अधिकार दिए।
वक्फ अधिनियम के प्रावधान क्या हैं:
धारा 3 (आर)
वक्फ क्या है - #मुस्लिम कानून द्वारा पवित्र, धार्मिक या धर्मार्थ के रूप में मान्यता प्राप्त किसी भी उद्देश्य के लिए कोई भी संपत्ति
(भारतीय कानून के अनुसार नहीं) अगर उन्हें लगता है कि जमीन #मुस्लिम की है तो वह वक्फ हो जाती है
तो मान लीजिए आपने 2010 में रमेश से जमीन खरीदी और रमेश ने 1965 में सलीम से जमीन खरीदी थीं तो वक्फ बोर्ड दावा कर सकता है कि 1964 में सलीम ने वह जमीन वक्फ को दे दी थी और अब वह उनकी जमीन है।
अब आप क्या कर सकते हो?
आप कोर्ट नहीं जा सकते ...आपको राज्य वक्फ बोर्ड जाना होगा
भारत में 1 केंद्रीय वक्फ बोर्ड और 32 राज्य वक्फ बोर्ड हैं । वक्फ बोर्ड 7 व्यक्तियों की समिति है। वह सभी व्यक्ति #मुस्लिम हैं
कांग्रेस द्वारा मंदिर अधिनियम के तहत राज्य सरकार द्वारा सभी मंदिरों को अपने नियंत्रण में रखा और कहा एक गैर हिंदू भी मंदिर बोर्ड का सदस्य बन सकता है लेकिन
वही कांग्रेस ने वक्फ बोर्ड को स्वायत्त रखा और लिखा कि कोई भी गैर मुस्लिम वक्फ बोर्ड का हिस्सा नहीं बन सकता।
वक्फ बोर्ड में एक सर्वेक्षक होता है जमीनों का सर्वेक्षण करता रहता है और अगर उसे लगता है कि कोई संपत्ति वक्फ की है तो वे नोटिस जारी कर सकते हैं।
धारा 4 सर्वेक्षक को वही
असीमित शक्ति देता है।वक्फ का नेतृत्व सीईओ करते हैं जो #मुस्लिम होना चाहिए। धारा 28 वक्फ सीईओ को कलेक्टर को आदेश देने की शक्ति देती है।
इसलिए जैसे ही आपको नोटिस मिलता है, आपको सभी ड्रॉइंग, रजिस्ट्री, पेपर और वक्फ बोर्ड को यह समझाने के लिए दौड़ना पड़ता है कि यह आपकी जमीन है।
अब वक्फ अधिनियम का सबसे कठोर लेख आता है
अनुच्छेद 40 यह लेख भयानक है
(मैं लेख 40 को अंग्रेजी और हिन्दी दोनों में अटैच कर रहा हू। ) कृपया इसे पढ़ें।
चाहे आपकी जमीन हो या वक्फ जमीन यह वक्फ बोर्ड द्वारा तय किया जाएगा और उनका निर्णय ही अन्तिम निर्णय होगा वक्फ खुद में पुलिस, जज
और वकील भी है।
इसलिए आप वक्फ को संतुष्ट नहीं कर सकते कि उसकी जमीन नहीं है और आपको अपनी जमीन खाली करने के लिए कहा गया है। आप अभी भी कोर्ट नहीं जा सकते।
आप वक्फ ट्रिब्यूनल कोर्ट जा सकते हैं
हर राज्य में केवल 1-2 अदालतें हैं। तो आपको राजधानी जाना होगा । वहां अपना मामला दर्ज
करना होगा।
धारा 83 न्यायाधिकरण के दायरे में है ट्रिब्यूनल में 2 न्यायाधीश होंगे (कोई धर्म निर्दिष्ट नहीं) और एक #मुस्लिम। आपने ट्रिब्यूनल में अपना केस लड़ा और मान लीजिए कि आप अपना केस हार गए क्योंकि ट्रिब्यूनल में भी उनका सदस्य है तो आपके लिए यहां क्या विकल्प हैं धारा 85 में एक
और बम फूटता है धारा 85 कहती है कि ट्रिब्यूनल का फैसला अंतिम हैकोई भी सिविल कोर्ट (सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट) ट्रिब्यूनल कोर्ट के आदेश को नहीं बदल सकता !
हालांकि बाद में इस खंड को सुप्रीम कोर्ट ने मई 2022 में राजस्थान जिंदल सॉ केस में रोक दिया था
#SC ने कहा कि कोई भी अदालत हमसे
बेहतर नहीं है और हम किसी भी फैसले में हस्तक्षेप कर सकते हैं।2005 में, यूपी वक्फ बोर्ड ने एएसआई के खिलाफ ताजमहल पर दावा किया, हालांकि वे सुप्रीम कोर्ट में केस हार गए
उन्होंने ज्ञानवापी मामले में भी वक्फ अधिनियम के प्रावधानों का इस्तेमाल किया लेकिन वहां भी वे हार गए
सवाल यह है कि शक्तिशाली लोग महंगे वकील रख सकते हैं और सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं लेकिन आम आदमी का क्या? #तमिलनाडु में वक्फ ने एक पूरे गांव का दावा किया।
जब वक्फ दावा करता है तो यह पीड़ित जिम्मेदारी है की वो अपना अधिकार साबित करे।
सवाल यह है कि #धर्मनिरपेक्ष देश में धार्मिक
कृत्य कैसे हो सकता है?
1. हिंदू, ईसाई और सिख के लिए ऐसा कुछ नहीं
2. यदि कोई ईसाई, सिख, जैन किसी हिंदू भूमि का अतिक्रमण करता है या इसके विपरीत, तो उन्हें सिविल कोर्ट जाना पड़ता है लेकिन अगर कोई #मुस्लिम, हिंदू या किसी अन्य धर्म की भूमि का अतिक्रमण करता है तो क्या उसे वक्फ
ट्रिब्यूनल जाना होगा ? इस कठोर अधिनियम के कारण, वक्फ भारत का सबसे धनी निकाय बन गया है, जिसकी 6 लाख संपत्ति और बाजार मूल्य 12 लाख करोड़ है।
वक्फ इस जमीन को किराए पर देता है और इससे करोड़ों रुपये कमाता है जो उनके धार्मिक उत्थान, लड़ाई के मुकदमे के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
सरकार उन्हें वित्तीय सहायता भी प्रदान करती है
यह विशेषाधिकार सिर्फ एक धर्म को ही क्यों?
इसमें ध्यान देने योग्य बात यह है की सरकार की इन्हे वित्तिय सहायता प्रदान करती है।दूसरी तरफ सरकार हिंदू मंदिरों से हर साल 1 लाख करोड़ रुपये लेती है जिसका इस्तेमाल गैर हिंदू कार्यों के लिए किया
जाता है जबकि दूसरी तरफ सरकार पहले से ही सबसे अमीर वक्फ के लिए धन देती है।
क्या सरकार का ये दायित्व नहीं की एक धर्मनिरपेक्ष देश में ऐसी संस्था को अविलम्ब भंग किया जाए और देश में समान आचार संहिता अधिनियम लागू हो
आप पूरा वक्फ एक्ट 95 यहां पढ़ सकते हैं
indiankanoon.org
या
minorityaffairs.gov.in
महत्वपूर्ण खंड: 3 (आर), 4,6,7,11,19,23, 23,29,30,40,77,83,85,99
वक्फ सदस्यों को वेतन व भत्ता वक्फ फंड द्वारा प्रदान किया जाता है।
वक्फ के पास प्रशासनिक, पर्यवेक्षी और न्यायिक शक्तियां हैं लेकिन निष्पादन शक्ति अभी भी कलेक्टर, डीएम और पुलिस के पास है
लेकिन जैसे-जैसे IAS, IPS में जनसांख्यिकी परिवर्तन होता है, वैसे-वैसे वक्फ अधिनियम 10 गुना अधिक घातक हो जाएगा।
वक्फ एक्ट अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है
भारतीय संविधान किसी भी ऐसे कार्य की अनुमति नहीं देता है जो अन्य धर्मों के अधिकार का अतिक्रमण करता हो
1995 में कांग्रेस ने परोक्ष रूप से एक समुदाय को भारत दे दिया
अगर कोई शब्द त्रुटि हो तो क्षमा करे
#वक़्फ़_बोर्ड_भंग_करो
आभार/credit -@Starboy2079🙏🕉️

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