क्या आपने कभी इस बात पर विचार किया है कि क्या हमारे छात्र इतने मेधावी हो गए है कि आजकल छात्र 100 प्रतिशत अंक भी ले आते है या फिर हमारा मूल्यांकन सिस्टम ही इतना ढीला हो चुका है ?
और फिर भी सुनिए जिन छात्रों ने 100% score किया है वो कह रहे की वे संतुष्ट नही है!!
#Thread
और फिर भी सुनिए जिन छात्रों ने 100% score किया है वो कह रहे की वे संतुष्ट नही है!!
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क्या ये सम्भव है ? अगर सही तरीके से उत्तर पुस्तिकाओ का मूल्यांकन किया जाये, तो भी केवल multiple choice Questions के अलावा ये किसी भी सूरत में संभव नही कि 100% स्कोर कर लिया जाये।
Long answers लिखते हुए, भले ही किसी छात्र के पास दुर्लभ "photogenic memory" क्यों ना हो,
Long answers लिखते हुए, भले ही किसी छात्र के पास दुर्लभ "photogenic memory" क्यों ना हो,
फिर भी Maths के अलावा किसी भी Subject मे 100% अंक ले पाना संभव नही होता
पता नही कैसे आज के परीक्षक, उत्तर पुस्तिकाओ (Answer sheets) का मूल्यांकन करते होंगे?
इन 99% प्रतिशत, 100% वालो की पोल तब खुल जाती है।जब प्रतियोगी परीक्षाओ मे इनकी काबिलियत पता नहीं कहाँ गुम हो जाती
पता नही कैसे आज के परीक्षक, उत्तर पुस्तिकाओ (Answer sheets) का मूल्यांकन करते होंगे?
इन 99% प्रतिशत, 100% वालो की पोल तब खुल जाती है।जब प्रतियोगी परीक्षाओ मे इनकी काबिलियत पता नहीं कहाँ गुम हो जाती
मेडिकल, इंजीनियरिंग या फिर सिविल सर्विसेज को देख लीजिए, प्रश्नो का उत्तर, चार विकल्पो मे से चुनना होता है, तब भी 100% तो छोडिये, 80% स्कोर के लाले पड जाते है।
Negative marking उन 100% scoring छात्रों की पोल पूरी तरह से खोल देती है
और यहाँ तो OBJECTIVE प्रश्नो को तो छोड ही दिजिए
Negative marking उन 100% scoring छात्रों की पोल पूरी तरह से खोल देती है
और यहाँ तो OBJECTIVE प्रश्नो को तो छोड ही दिजिए
Descriptive (विस्तार पूर्वक) उत्तर लिखकर भी पूरे अंक मिल रहे है, क्या लिखने वाले ने comma, full stop, grammar, spelling की किसी भी subject मे एक भी गलती नही करी होगी?
अब मजाक बनकर रह गया ये मूल्यांकन सिस्टम और हाल ये की 100% marks लाकर भी छात्र संतुष्ट नहीं होते
अब मजाक बनकर रह गया ये मूल्यांकन सिस्टम और हाल ये की 100% marks लाकर भी छात्र संतुष्ट नहीं होते
एक वो वक्त भी था 80s 90s का, जब 60% प्रतिशत अंक लेकर "फर्स्ट डिवीजन" बनाने मे पसीने छूट जाते थे। पूरे क्लास में मे 5-10 बच्चे ऐसे होते थे, जो "फर्स्ट डिवीजन" ला पाते थे।
ये 98% और 99% प्रतिशत केवल parents को मूर्ख बनाने का खेल है। पहले तो बच्चों को overburden करो
ये 98% और 99% प्रतिशत केवल parents को मूर्ख बनाने का खेल है। पहले तो बच्चों को overburden करो
और फिर मुफ़्त भाव से नम्बर बाँटो, बाद मे फिर जब यही बच्चे मेडिकल, इंजीनियरिंग की प्रतियोगिता मे बैठकर सीट नही निकाल पाते तो माता-पिता को लगता है, उनके जीनियस पुत्र अथवा पुत्री ने रिश्तेदारों के सामने उनका नाम ख़राब कर दिया और फिर उन पर competition निकालने का pressure डालना शुरू
हो जाते, चाहें वे उसके लिए मानसिक रूप से तैयार हों या नहीं
फिर शुरू होता है,Allen, Pace, Rao,Aakash, Bansal institute मे बच्चो को घिसने का गंदा खेल।
और अगर सीट फिर भी N निकले तो frustration level इतना की कभी कभी उसके अत्यन्त भयावह परिणाम मिलते परिजनो को
फिर शुरू होता है,Allen, Pace, Rao,Aakash, Bansal institute मे बच्चो को घिसने का गंदा खेल।
और अगर सीट फिर भी N निकले तो frustration level इतना की कभी कभी उसके अत्यन्त भयावह परिणाम मिलते परिजनो को
बच्चों के माता-पिता से अनुरोध है कि 10-12 के marks के आधार पे बड़े बड़े सपने मत पालिए उन्हें competitive बनाइए रट्टू नहीं
बच्चो की नंबर की दौड़ मे डालकर, उनके सर्वांगीण विकास (all-round development), स्पोर्ट्स, और Extracurricular activity पर ध्यान दीजिए
बच्चो की नंबर की दौड़ मे डालकर, उनके सर्वांगीण विकास (all-round development), स्पोर्ट्स, और Extracurricular activity पर ध्यान दीजिए
उनके imterest को बढ़ावा दीजिए जीवन मे उन्हे जो बनना होगा वो बन जायेंगें। उनके जीवन को अपनी इक्षाओं के बोझ तले न पीसिये
हर बच्चा सुंदर पिचाई नही होता, पर हर बच्चा अपने आप मे unique ज़रूर होता है। केवल इंजीनियर और डॉक्टर बनकर ही लोग सफल नही कहलाते,
हर बच्चा सुंदर पिचाई नही होता, पर हर बच्चा अपने आप मे unique ज़रूर होता है। केवल इंजीनियर और डॉक्टर बनकर ही लोग सफल नही कहलाते,
जीवन मे कुछ करने को हजारो फील्ड है, नाम कमाने या कुछ बड़ा करने के लिए 100% लाना जरूरी नहीं होता बल्कि सच तो ये है, पूरी दुनिया मे शायद ही आज तक कोई ऐसा महान या सफलतम व्यक्ति होगा जिसने अपनी स्कूलिंग के दिनो मे 100% स्कोर किया हो।
सोच बदलिए, सही दिशा स्वयं मिलेंगी 🙏🏻
सोच बदलिए, सही दिशा स्वयं मिलेंगी 🙏🏻
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