इसका निर्माणलाल पत्थरों से हुआ है,यह वन प्रदेश का पहाड़ी दुर्ग है।
बयान के महाराजा विजयपाल के एक पुत्र मदनपाल मण्डपाल ने मंडरायल को आबाद किया और वहा एक किले का निर्माण 1184 के आसपास कराया था जो आज खंडहर स्थित में है।
मेडिकोटोपोग्राफिकल गजेटियर के अनुसार भी इस दुर्ग का निर्माण
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बयान के महाराजा विजयपाल के एक पुत्र मदनपाल मण्डपाल ने मंडरायल को आबाद किया और वहा एक किले का निर्माण 1184 के आसपास कराया था जो आज खंडहर स्थित में है।
मेडिकोटोपोग्राफिकल गजेटियर के अनुसार भी इस दुर्ग का निर्माण
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किसी यदुवांशी जादो राजा ने ही कराया था।
वीरविनोद के अनुसार यह किला पूर्व राजपूत कालीन है, किले की ऊंचाई अधिक नहीं है। कुछ सीढ़ियां पार करने के बाद किले का मुख्य भू-भाग आता है।
किले में दो तालाब है तथा कुछ देव मंदिर भी है,किला जीर्ण-शीर्ण है।
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वीरविनोद के अनुसार यह किला पूर्व राजपूत कालीन है, किले की ऊंचाई अधिक नहीं है। कुछ सीढ़ियां पार करने के बाद किले का मुख्य भू-भाग आता है।
किले में दो तालाब है तथा कुछ देव मंदिर भी है,किला जीर्ण-शीर्ण है।
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किले के दो द्वार थे जिनमें सुरजपोल मुख्य द्वार था। यह द्वार इस बात के लिए प्रसिद्ध हे कि इसमें सुबह से शाम तक सूर्य का प्रकाश देखा जा सकता है।
इसी दरवाजे की तराई में मंडरायल कस्था आबाद है, जिसके तीनों और बड़े-बड़े दरवाजों युक्त प्रचीर है।
यह दुर्ग करोली से 40 दूरी पर दक्षिण ,
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इसी दरवाजे की तराई में मंडरायल कस्था आबाद है, जिसके तीनों और बड़े-बड़े दरवाजों युक्त प्रचीर है।
यह दुर्ग करोली से 40 दूरी पर दक्षिण ,
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पूर्व में है, पूर्व में मंडरायल अपने बागों लिए प्रसिद्ध था।
मंडरायल का यह दुर्ग ग्वालियर के पास स्थित होने से मध्यकाल में बड़ा प्रसिद्ध था, इस किले को ग्वालियर की कुंजी माना जाता था।
महाराजा कुंवरपाल के वंशज गोकुलदेव के पुत्र अर्जुनपाल ने 1327 में मंडरायल के मक्खन खां को
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मंडरायल का यह दुर्ग ग्वालियर के पास स्थित होने से मध्यकाल में बड़ा प्रसिद्ध था, इस किले को ग्वालियर की कुंजी माना जाता था।
महाराजा कुंवरपाल के वंशज गोकुलदेव के पुत्र अर्जुनपाल ने 1327 में मंडरायल के मक्खन खां को
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परास्त कर अपने पूर्वजों के राज्य को फिर से प्राप्त करना प्रारंभ किया।
अर्जुनपाल ने मंडरायल के आसपास रहने वाले मीणों तथा पंवार राजपूतों को परास्त कर राज्य का विस्तार किया।
1348 में कल्याणपुरी नामक नगर बसाया तथा कल्याणजी का मंदिर बनवाया।
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अर्जुनपाल ने मंडरायल के आसपास रहने वाले मीणों तथा पंवार राजपूतों को परास्त कर राज्य का विस्तार किया।
1348 में कल्याणपुरी नामक नगर बसाया तथा कल्याणजी का मंदिर बनवाया।
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कल्याणपुरी ही बाद में करोली नाम से जानी जाने लगी।
यदुवंशियों के शौर्य को दर्शाता हजार साल से खड़ा ये किला आज लगभग खंडहर स्थिति में आ गया है।
~ From ✍️ " @DrDhirendraSi11 "
जय श्री कृष्ण, जय यदुवंश
जय राजपुताना 🙏🏻⛳
@rajput_of_india
यदुवंशियों के शौर्य को दर्शाता हजार साल से खड़ा ये किला आज लगभग खंडहर स्थिति में आ गया है।
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