उन्हेंं विश्वास था कि महादेवी की बात निरालाजी नहीं टालेंगे। वे महादेवी के साथ निराला को लेने दारागंज पहुंचे। महादेवी ने अवसर के अनुकूल देखकर बात की और राष्ट्रपति के आग्रह के बारे में बताया और कहा कि आपको लेने मोटर आयी हुई है और महामहिम आपसे मिलना चाहते है।
चलने के निवेदन पर निराला जी ने जो जवाब दिया वो उनके फक्कड़ मिजाज को दर्शाता है। राष्ट्रपति के पीए से निराला ने कहा, “मैं वहां क्या करने जाऊं। अगर वे डॉ. राजेन्द्र प्रसाद हैं तो वे भी यहां आ सकते हैं, जैसे निराला उनके पास जा सकता है।”
“और अगर राष्ट्रपति की हैसियत से मुझे बुला रहे हैं तो मुझे राष्ट्रपति से कुछ नहीं लेना देना। वे राष्ट्रपति हैं तो मैं साहित्यपति हूं। अब महादेवी जी के पास भी कोई चारा नहीं था। सभी लोग वापस चले गए।”
रास्ते में एक तांगे पर बकरी जाती दिखी। निराला जी ने साथ चल रही महादेवी से कहा- “हिंदी का कवि पैदल जा रहा है और बकरी तांगे पर। जरूर यह बापू की बकरी होगी।” था भी ऐसा ही।
आज महाप्राण “निराला” का जन्मदिन है 💓
🙏🏻वर दे वीणा वादिनी वर दे 🙏🏻
#nirala #सूर्यकान्त_त्रिपाठी #निराला #वसंत_पंचमी #निराला_जन्मतिथि
तस्वीर - आईटी चौराहा, लखनऊ में निराला जी कि प्रतिमा की साफ सफाई।
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