𝐏𝐫𝐚𝐬𝐡𝐚𝐧𝐭 𝐒𝐢𝐧𝐡 پرشانت گانا
𝐏𝐫𝐚𝐬𝐡𝐚𝐧𝐭 𝐒𝐢𝐧𝐡 پرشانت گانا

@The_Jadon7

13 Tweets 21 reads Feb 02, 2022
#Theard
𝐓𝐇𝐄 𝐑𝐄𝐀𝐋 #𝐘𝐀𝐃𝐀𝐕 𝐑𝐄𝐀𝐋 𝐘𝐀𝐃𝐔 𝐕𝐀𝐍𝐒𝐇𝐈 𝐑𝐀𝐉𝐏𝐔𝐓
गजब विडम्बना है आज असली यदुवंशियो को कोई नही जानता और फर्जी यदुवंशी सारे देश में सिर्फ सौ सालो के भीतर छदम पहचान से छा गए हैं🥴
आइए जाने विस्तार से यदुवंशी क्षत्रिय राजपूतों के बारे में 🙋‍♂️⛳
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जब जब धर्म की हानि हुई अधर्म का जोर बढ़ा तो भगवान नारायण क्षत्रिय वर्ण में अवतार लेकर आतताइयों का संहार करते क्षत्रियों में सुर्यवंश की रघुवंश में भगवान श्री राम के रूप में और चन्द्रवंश की यदुवंशी शाखा में योगिराज श्री कृष्ण के रूप में नारायण ने अवतार लिया !!
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श्रीकृष्ण का बाल्यकाल में लालन पालन नन्दबाबा के यहाँ हुआ था,नन्दबाबा गोकुल में अहीरो से कर वसूलने का कार्य करते थे,जबकि श्री कृष्ण यदुवंशी क्षत्रिय थे,
पर पिछले सौ सालो से सभी अहीरों ने भगवान् श्री कृष्ण से जोड़कर खुद को यादव लिखना शुरू कर दिया है पर ये एक ऐसा झूठ है!!
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जिसने सच का रूप धारण कर लिया
जबकि महाभारत के मुसल पर्व में साफ़ लिखा है कि जब अर्जुन यदुवंशी स्त्री बच्चो को द्वारिका से वापस लेकर आ रहे थे तो मार्ग में उन्हें अभिरो अहीरों ने लूट लिया था
तभी कहा गया कि,
"समय होत बलवान,अभीरन लूटी गोपिका
वही अर्जुन,वही बाण "!!
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जिन्होंने यदुवंशी स्त्रियों बच्चो को असहाय स्थिति में "लूट लिया था" विडम्बना देखिये आज वही अहीर यादव उपनाम लिखने लगे और असली यदुवंशी राजपूतो ने भाटी ,जादौन,जडेजा आदि नये उपनाम धारण कर लिए।
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19 वी सदी तक भी अहीर खुद को यादव नही मानते थे रेवाड़ी के यदुवंशी अहीर खुद को राजपूत ही मानते थे जिनमें राजपूतों की शाखाएं गई थी,
पर लगभग सन 1915-20 के आसपास अहिरो की महासभा हुई जिस के बाद से ग्वाल ,गोप,अहर,घोसी,कमरिया अहिरो ने अचानक से यादव उपनाम लिखना शुरू कर दिया!!
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जबकि गुजरात,महाराष्ट्र के अहीर आज भी खुद को यादव नही लिखते हैं।
शुद्ध रक्त के यदुवंशी क्षत्रिय सिर्फ राजपूतो और मराठो में जादौन, भाटी, जडेजा, चुडासमा, जाधव, छोकर, सलारिया हैहय,कलचुरी,सरवैया आदि वंशो में मिलते हैं,
इन सब यदुवंशी क्षत्रिय शाखाओ की अपनी रियासते रही है!!
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पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के कुछ क्षत्रिय बन्धु अक्सर यदुवंशी राजपूत शब्द पर भ्रमित हो जाते हैं क्योंकि उस इलाके में यदुवंशी राजपूत न के बराबर हैं और वो अक्सर अहीर ग्वालों को ही यदुवंशी समझते हैं,
दरअसल श्रीकृष्ण का जन्म यदुवंशी क्षत्रियों में हुआ था,परिस्थितिवश उनका,
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उनका लालन पालन गोकुल में आभीर ग्वालों के बीच हुआ था,जबकि उन ग्वालो का यदुवंश से कोई सम्बन्ध नही था।
जैसे यमुना का नाम अपभ्रंश होकर जमुना हो गया इसी तरह आम बोल चाल की भाषा में बृज के यदुवंशी पहले यादव से जादव फिर जादों और जादौन कहलाए जाने लगे!!
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जबकि भाटी जाड़ेजा आदि यदुवंशी शाखाएं नए वंशनाम से प्रसिद्ध हो गयी,
इसका लाभ उठाकर सन् 1915 में ब्रिटिश काल में अहीर,गोप, ग्वाला, अहर ,कमरिया, घोसी जैसी अलग अलग जातियों ने मिलकर एक संस्था बनाई और मिलकर खुद को यादव घोषित कर दिया,जबकि उससे पहले किसी रिकॉर्ड अभिलेख में इन अलग
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अलग जातियो को कभी यादव नही कहा गया न ही ये खुद को यादव कहते थे
दरअसल आज जो यादव जाति कहलाई जाती है वो एक दस बारह अलग जातियों का एक समूह है जिसने महज सौ वर्ष पहले खुद को यादव घोषित कर दिया और एकता के बल पर राजनैतिक ताकत हासिल करके एक झूठ को सत्य के रूप में प्रचारित कर दिया।
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आज भी इन नकली यादवो की अलग जातियो में आपस में विवाह सम्बन्ध नही होते,सिर्फ राजनैतिक ये एकजुट हैं
सिर्फ रेवाड़ी के अहीर यदुवंशी कहे जा सकते हैं क्योंकि ये खुद को यदुवंशी राजपूतो से अंतर्जातीय विवाह सम्बन्धो द्वारा अहीरों में बताते थे अब ताकतवर होकर वो भी मुकरने लगे हैं 🥴
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यदुवंशी क्षत्रियों की शाखाएं अंतरजातीय विवाह के कारण अन्य जातियों में भी चली गई जैसे,
~भरतपुर के सिनसिनवार जाट
~एनसीआर के भाटी गुज्जर (राव कासल वाले)
~पाकिस्तान के सिंध में सम्मा, भुट्टो, भुट्टा
योगेश्वर श्री कृष्ण ☝️
जय यदुवंश, जय क्षात्र धर्म 🙏🏻⛳
@rajput_of_india

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